मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए शुक्रवार से नामांकन शुरू हो रहा है. ऐसे में कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टियां अपने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट गुरुवार को जारी कर सकती हैं.
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए गुरुवार को कांग्रेस और बीजेपी अपने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर सकते हैं. बुधवार को कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) की बैठक हुई, जिसमें अभी तक कुल 160 सीटों पर सिंगल नाम तय कर लिए हैं. वहीं, बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक गुरुवार होनी है और माना जा रहा देर रात लिस्ट जारी कर सकती है.
बीजेपी ने मध्य प्रदेश में उम्मीदवारों के चयन के लिए सर्वे को आधार बनाया है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित अन्य नेताओं के बीच हुए बैठक में सर्वे के तहत 70 से 80 फीसदी सीटों पर नामों को सिंगल नाम तय कर लिए हैं.
बीजेपी केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक गुरुवार को होगी. माना जा रहा है कि इसी दिन देर रात तक बीजेपी पहली लिस्ट जारी कर सकती है.
दिल्ली में चर्चा के दौरान महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने खुद के बजाय बेटे आकाश के लिए इंदौर शहर की किसी एक सीट से टिकट मांगा है, जिस पर शाह गुरुवार को निर्णय लेंगे. शाह के साथ चर्चा में इस बात पर भी सहमति बन गई है कि लंबे समय से संगठन में काम कर रहे कुछ पदाधिकारियों को भी इस बार विधानसभा का टिकट मिले.
कांग्रेस की सीईसी ने बुधवार को स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा भेजे गए 30 सिंगल नामों को मंजूरी दे दी है. ये नाम बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र से हैं. कांग्रेस ने160 सीटों पर दावेदारों के नामों तकरीबन फाइनल कर चुकी है. उम्मीदवारों को लेकर अब तक स्क्रीनिंग कमेटी की 12 राउंड की बैठकें हो चुकी हैं. कांग्रेस पहली सूची गुरुवार घोषित कर सकती है.
बता दें कि मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया 2 नवंबर से शुरू हो रही है, जो 9 नवंबर तक चलेगी. इसको ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने 5 नवंबर तक अपनी सभी सूचियां जारी करने की संभावना जताई है. वहीं बीजेपी भी अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर सकती है.
बता दें कि अस्सी के दशक के अंत में अंबेडकर मूवमेंट जोर पकड़ने लगा था. इसके बाद यहां सबसे ज्यादा महाराष्ट्र से आंबेडकर अनुयायियों के आने का यहां सिलसिला शुरू हुआ, फिर देश के दूसरे राज्यों से आने लगे. 90 का दशक आते-आते महू पूरी तरह बाबा साहेब की जन्मस्थली के रूप में अपनी पहचान बना लिया था. ये वही समय था जब कांशीराम ने बीएस-4 का गठन किया था.
मध्य प्रदेश में बीजेपी की सुंदर लाल पटवा की सरकार थी. 1991 का लोकसभा चुनाव के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, कांशीराम, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी, मायावती महू आए थे. इसके बाद प्रदेश की सत्ता पर कांग्रेस के दिग्विजय सिंह काबिज हुए तो यहां नेताओं के आने का सिलसिला और भी तेज हो गया.
बता दें कि 2008 में लालकृष्ण आडवाणी ने अंबेडकर स्मारक का लोकार्पण किया था. इसके अलावा 2013 में अंबेडकर स्मारक में पांच प्रतिमाओं का अनावरण हुआ . इसके बाद 2 जून 2015 को राहुल गांधी और अंबेडकर जयंती 14 अप्रैल 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और 14 अप्रैल 2018 को राष्ट्रपति डॉ. रामनाथ कोविंद यहां आए थे.
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसी महीने 22 अक्टूबर को जन आशीर्वाद यात्रा के बाद अंबेडकर स्मारक पहुंचे थे. इसी दिन पटेल नेता हार्दिक पटेल भी मालवा में किसान रैली से पहले महू के अंबेडकर स्मारक पर जाकर माथा टेका था.
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